सदके मै जावा सोणी शान वालेया

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॥ पावन पाठ ॥

सदके में जावा सोणी शान वालेया,

मिट्टी दिया मूर्ता बनान वालेया॥

अंखा दितिया गुरा दे दर्श पाऊँन नू,

निकी जई जीभा दिती गुण गाउन नू,

कन्ना राही शब्द सुनान वालेया,

मिट्टी दिया मूर्ता बनान वालेया,

सदके में जावा सोणी शान वालेया,

मिट्टी दिया मूर्ता बनान वालेया॥

पैरा नाल गई सत्संग चल के,

मन मेरा लगे बैठी बुआ मल के,

एना मूर्ता च तू समान वालेया,

मिट्टी दिया मूर्ता बनान वालेया,

सदके में जावा सोणी शान वालेया,

मिट्टी दिया मूर्ता बनान वालेया॥

ईक हाथ नाल चंगा काम करी बंदया,

दूजे हाथ नाल फल तू पाई बंदया,

कर्मा दे खेड तू दिखान वालेया,

मिट्टी दिया मूर्ता बनान वालेया,

सदके में जावा सोणी शान वालेया,

मिट्टी दिया मूर्ता बनान वालेया॥

ऋषि मुनि गुण तेरा गाया ना गया,

जिस गाया पार तेरा पाया ना गया,

ओना नू वी पार लगाण वालेया,

मिट्टी दिया मूर्ता बनान वालेया,

सदके में जावा सोणी शान वालेया,

मिट्टी दिया मूर्ता बनान वालेया॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।