मेरा कोई नहीं संसार में

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मेरा कोई नहीं संसार में,

आई मैया तेरे दरबार में,

मैया सुन ले दिल की मेरी,

ना दे दुःख से मुझको फेरी,

दई दुनिया ने दुत्कार,

आई मैया तेरे दरबार में,

मेरा कोई नहीं संसार में,

आई मैया तेरे दरबार में॥

जेठ जिठानी ताने मारे,

कैसे मेरा जीना,

जेठ जिठानी ताने मारे,

कैसे मेरा जीना,

दुनिया मने बाँझ बतावे,

सुन के फटे है मेरा सीना,

हसे सखी सहेली मुझपे,

मने भरोसा मैया तुझपे,

ऐसी हो गयी लचार में,

आई मैया तेरे दरबार में,

मेरा कोई नहीं संसार में

आई मैया तेरे दरबार में.......

रात दिन मने मारे कुटे,

घर ते बाहर भगावे,

रात दिन मने मारे कुटे,

घर ते बाहर भगावे,

जिसके साथ मने लिए फेरे,

ना आकर मने बचावे,

घर ते बाहर निकल जा मेरे,

नई तो धक्के मारू तेरे,

समझी दुनिया ने माँ, बेकार मैं,

आई मैया तेरे दरबार में,

मेरा कोई नहीं संसार में,

आई मैया तेरे दरबार में.....

मैं दुखियारी गम की मारी,

दुश्मन दुनिया सारी,

मैं दुखियारी गम की मारी,

दुश्मन दुनिया सारी,

मईया मेरी लाज राखियो,

शरण मैं आयी तुम्हारी,

चंगी दुनिया बचा के जावन,

गुण खिला दो मेरे आंगन,

पड़ी इस गम की बीमार मैं,

आई मैया तेरे दरबार में,

मेरा कोई नहीं संसार में,

आई मैया तेरे दरबार में.....

मत रो बेटी है के जाईये,

गोदी में लाल खिलाइए,

मत रो बेटी है के जाईये,

गोदी में लाल खिलाइए,

इतने जुलम दुनिया ने डाये,

हुन ना बेटा घबराइए,

दर से कभी ना खाली टाला,

कहता ‘नसीब भिमानी’ वाला,

फसी दुनिया के मझदार में,

आई मैया तेरे दरबार में,

मेरा कोई नहीं संसार में,

आई मैया तेरे दरबार में.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।