सुरमा छाई रात अंधेरी

पारंपरिक
अन्य भजन रानी सती दादी भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

सुरमा छाई रात अंधेरी जी घबराव ए

आजा म्हारी दादी म्हान .

ओल्यूं आव ए

था बिन ना दादी म्हारो .कोई सहाई जी

आओ म्हारी कुल की देवी

ओल्यूं आव ए

टप टप आंसुडा़ टपके.कालजो फाट ए

आओ म्हारी कुल की देवी

ओल्यूं आव ए

अंधियारी रात डराव .कोई ना दिख ए

आओ म्हारी कुल की देवी

ओल्यूं आव ए

बालक नादान थारा. जी घबराव ए

आओ म्हारी कुल की देवी

ओल्यूं आव ए

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।