ओ जंगल के राजा आजा

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

ओ जंगल के राजा आजा,

माँ भगतो को ना तड़पा,

नैन हुए बेचैन सभी के,

इतना इनको ना तरसा,

मेरी मैया को लेके आ,

शेरावाली को लेके आ,

मेहरावाली को लेके आ,

ज्योतावाली को लेके आ,

ओ जंगल के राजा आजा,

माँ भगतो को ना तड़पा.......

सर पर ओढ़े लाल चुनरिया,

गल बैजंती माला,

सर पर ओढ़े लाल चुनरिया,

गल बैजंती माला,

चाँद सितारों की ज्योति का,

माँ के अंग उजाला,

चाँद सितारों की ज्योति का,

माँ के अंग उजाला,

जाके पवन से आ,

मेरी मैया को लेके आ,

शेरावाली को लेके आ,

ज्योतावाली को लेके आ,

ओ जंगल के राजा आजा,

माँ भगतो को ना तड़पा.......

सुन्दरता गुणगान करू क्या,

मधुबन भी शर्माए,

सुन्दरता गुणगान करू क्या,

मधुबन भी शर्माए,

जैसे हिमालय हिम चादर को,

पहन पहन के हर्षाये,

जैसे हिमालय हिम चादर को,

पहन पहन के हर्षाये,

ओ छवि अजब अलग छलका,

मेरी मैया को लेके आ,

शेरावाली को लेके आ,

ज्योतावाली को लेके आ,

ओ जंगल के राजा आजा,

माँ भगतो को ना तड़पा.......

माँ से कहना भक्तजनो ने,

बड़ी ही आस लगाई,

माँ से कहना भक्तजनो ने,

बड़ी ही आस लगाई,

दुनिया तो गैरो से भरी पर,

तू क्यों हुई परायी,

दुनिया तो गैरो से भरी पर,

तू क्यों हुई परायी,

ओ लाके मधुर मिलन करवा,

मेरी मैया को लेके आ,

शेरावाली को लेके आ,

ज्योतावाली को लेके आ,

ओ जंगल के राजा आजा,

माँ भगतो को ना तड़पा.......

तू तो माँ का सेवक ठहरा,

मान तेरी जाएगी,

तू तो माँ का सेवक ठहरा,

मान तेरी जाएगी,

वर्मा को थोड़ी मोहलत से,

माँ मिल जाएगी,

वर्मा को थोड़ी मोहलत से,

माँ मिल जाएगी,

मैं भी लूंगा चरण दबा,

मेरी मैया को लेके आ,

शेरावाली को लेके आ,

ज्योतावाली को लेके आ,

ओ जंगल के राजा आजा,

माँ भगतो को ना तड़पा.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।