भेरू थारी भक्ति में होकर के बावरा

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॥ पावन पाठ ॥

भेरू थारी भक्ति में होकर के बावरा,

अ र र नाचे हो भेरूजी थारा टाबरां ॥

भक्ति री रात आज आंगणे जो आई है,

हिलमिल बाबा थारी ज्योत जगाई है,

गुणगान गावे बाबा भक्त बेठिया आपरा,

अ र र नाचे हो भेरूजी थारा टाबरां ॥

सांकल ले हाथा में भोपा जी भी नाचरिया,

जठै देखो वठे नाम भेरू का ही गुंजरिया,

हीरा जड़िया आंगी में थारे सवा लाखरा,

अ र र नाचे हो भेरूजी थारा टाबरां ॥

भक्तो रा सागे नाचे भैरव मतवालों रे,

प्यार लुटावे बाबो बड़ो दिलवालों रे,

"दिलबर" दीवाना भक्त नाकोंडा रा धामरा,

अ र र नाचे हो भेरूजी थारा टाबरां॥

भेरू थारी भक्ति में होकर के बावरा,

अ र र नाचे हो भेरूजी थारा टाबरां ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।