भोले की दीवानी है मां पार्वती

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

हो जाओ भोले बाबा तुम तैयार,

है गौरा खड़ी लेकर फूलों का हार,

भोले की दीवानी है मां पार्वती।

भोले केसर का क्या-क्या श्रृंगार,

लंबी जटा और गंगा की धार,

फिर भी दीवानी है मां पार्वती।

भोले के माथे का क्या-क्या श्रृंगार,

तीसरा नेत्र और चंदा की धार,

फिर भी दीवानी है मां पार्वती।

भोले के कानो का क्या-क्या श्रृंगार,

बिच्छू ततैया और कुंडल श्रृंगार,

फिर भी दीवानी है मां पार्वती।

भोले के गले का क्या-क्या श्रृंगार,

मुंडो की माला और सर्पों का हार,

फिर भी दीवानी है मां पार्वती।

भोले के हाथों का क्या-क्या श्रृंगार,

लंबा त्रिशूल और डमरू की तान,

फिर भी दीवानी है मां पार्वती।

भोले के अंगो का क्या-क्या श्रृंगार,

बाघ अंबर छाला और भभूति अपार,

फिर भी दीवानी है मां पार्वती।

भोले के संग का क्या-क्या श्रृंगार,

भूत पिशाच और नंदी सवार,

फिर भी दीवानी है मां पार्वती।

भोले के चरणों का क्या-क्या श्रृंगार,

ढोलक चिमटा और भक्तों का प्यार,

फिर भी दीवानी है मां पार्वती।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।