एक दिन पार्वती कहने लगी भोले से

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

एक दिन पार्वती कहने लगी भोले से,

सारी उम्र गई जंगल में,

रही ना रंग महल में मेरे फूटे नसीब,

सुनलो रेे कैलाशी ।।

भोले आ गया चोमासा,

एक महल बना दो ऐसा के जिस में रहवे सती,

सुनलो रेे कैलाशी ।।

मेरे भोले ने महल बनवाया,

उसको नाम धरा दियो लंका,

भोले ने कैसी रची माया,

सुनलो रेे कैलाशी।।

गौरा ने गृह प्रवेश करवाया,

भोले बाबा ने रावण बुलाया,

के देवो में खलबल मची,

सुनलो रेे कैलाशी ।।

रावण ने हवन रचाया,

भोले बाबा ने गर्भ लुटाया,

दान में लंका दयी,

सुनलो रेे कैलाशी ।।

रावण मन में बड़ा हर्षाया,

भोले देखी तुम्हारी माया,

मैं बन गया लंकापती

सुनलो रेे कैलाशी ।।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।