घर घर में तुलसा सजी खड़ी

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन विविध भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

घर-घर में तुलसा सजी खड़ी,

शालिग्राम ढूंढ रहे गली गली॥

टीका लाया पहनू प्यारी क्यों सोच रही हो खड़ी खड़ी,

मुझे डर है राधा प्यारी का कहीं देख ना लेवे खड़ी खड़ी,

घर-घर में तुलसा सजी खड़ी,

घनश्याम ढूंढ रहे गली गली॥

झुमके लाया पहनो प्यारी क्यों सोच रही हो खड़ी खड़ी,

मुझे डर है राधा प्यारी का कहीं देख ना लेवे खड़ी खड़ी,

घर-घर में तुलसा सजी खड़ी,

शालिग्राम ढूंढ रहे गली गली॥

हरवा लाया पहनो प्यारी क्यों सोच रही हो खड़ी खड़ी,

मुझे डर है राधा प्यारी का कहीं देख ना लेवे खड़ी खड़ी,

घर-घर में तुलसा सजी खड़ी,

शालिग्राम ढूंढ रहे गली गली॥

कंगन लाया पहनो प्यारी सोच रही हो खड़ी खड़ी,

मुझे डर है राधा प्यारी का कहीं देख ना लेवे खड़ी खड़ी,

घर-घर में तुलसा सजी खड़ी,

शालिग्राम ढूंढ रहे गली गली॥

पायल लाया पहनो प्यारी क्यों सोच रही हो खड़ी खड़ी,

मुझे डर है राधा प्यारी का कहीं देख ना लेवे घड़ी घड़ी,

घर-घर में तुलसा सजी खड़ी,

शालिग्राम ढूंढ रहे गली गली॥

चुनरी लाया ओढो प्यारी क्यों सोच रही हो खड़ी खड़ी,

मुझे डर है राधा प्यारी का कहीं देख ना लेवे खड़ी खड़ी,

घर-घर में तुलसा सजी खड़ी,

शालिग्राम ढूंढ रहे गली गली॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।