खोलो हृदय के ताले मईया जी

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

खोलो हृदय के ताले मैया जी मेरा भाग लिख दो,

मैया जी मेरा भाग लिख दो,

खोलो हृदय के ताले मैया जी मेरा भाग लिख दो॥

पहला भाग मेरे माथे पे लिख दो,

माथे पे लिख दो माँ माथे पे लिख दो,

मैं शीश झुकाऊँ बारम्बार मैया जी मेरा भाग लिख दो,

खोलो हृदय के ताले मैया जी मेरा भाग लिख दो॥

दूजा भाग मेरा नैनो में लिख दो,

नैनो में लिख दो माँ नैनो में लिख दो,

दर्शन करू में बारम्बार मैया जी मेरा भाग लिख दो,

खोलो हृदय के ताले मैया जी मेरा भाग लिख दो॥

तीजा भाग मेरा कानो में लिख दो,

कानो में लिख दो माँ कानो में लिख दो,

भगवत सुनु में बारम्बार मैया जी मेरा भाग लिख दो,

खोलो हृदय के ताले मैया जी मेरा भाग लिख दो॥

चौथा भाग मेरी जिव्हा पे लिख दो,

जिव्हा पे लिख दो माँ जिव्हा पे लिख दो,

भजन करू में बारम्बार मैया जी मेरा भाग लिख दो,

खोलो हृदय के ताले मैया जी मेरा भाग लिख दो॥

पाचवा भाग मेरे ह्दय में लिख दो,

ह्दय में लिख दो माँ ह्दय में लिख दो,

सुमिरन करू मैं बारम्बार मैया जी मेरा भाग लिख दो,

खोलो हृदय के ताले मैया जी मेरा भाग लिख दो॥

छठवा भाग मेरे हाथो में लिख दो,

हाथो में लिख दो माँ हाथो में लिख दो,

दान करू मैं बारम्बार मैया जी मेरा भाग लिख दो,

खोलो हृदय के ताले मैया जी मेरा भाग लिख दो॥

सातवाँ भाग मेरे पैंरो में लिख दो,

पैंरो में लिख दो माँ पैंरो में लिख दो,

तीरथ करू मैं बारम्बार मैया जी मेरा भाग लिख दो,

खोलो हृदय के ताले मैया जी मेरा भाग लिख दो॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।