चारों धामों में विराजे भगवान

पारंपरिक
महादेव भजन विविध भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

चारों धामों में विराजे भगवान, चलो रे दर्शन कर आवे....-3

अवधपुरी में आए बिराजे राम लखन अवतारी,

राम लखन अवतारी संग में सीता जनक दुलारी,

सरयू मैया में करो रे स्नान, चलो री दर्शन कर आवे,

चारों धामों में विराजे भगवान, चलो रे दर्शन कर आवे॥

काशीनाथ में बैठे देखों शिव शंकर कैलाशी,

शिव शंकर कैलाशी संग में गौरा है महारानी

गंगा मैया में करो रे स्नान, चलो री दर्शन कर आवे,

चारों धामों में विराजे भगवान, चलो रे दर्शन कर आवे॥

मथुरा वृंदावन में विराजे मुरली के बजवइया,

मुरली के बजवइया संग में रहती राधा मैया,

जमुना मैया में करो रे स्नान, चलो री दर्शन कर आवे,

चारों धामों में विराजे भगवान, चलो रे दर्शन कर आवे॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।