हरो भरो री मेरो तुलसी को पेड़

पारंपरिक
विष्णु भगवान भजन विविध भजन vishnu
॥ पावन पाठ ॥

हरि हरि बगिया हरो भरो खेत,

हरो भरो री मेरो तुलसी को पेड़॥

कौन सीचे बगिया कौन सीचे खेत,

कौन सीचे री मेरो तुलसी का पेड़,

हरि हरि बगिया हरो भरो खेत,

हरो भरो री मेरो तुलसी को पेड़॥

माली सींचे बगिया किसान सींचे खेत,

ऋषि मुनि सींचे मेरो तुलसी का पेड़,

हरि हरि बगिया हरो भरो खेत,

हरो भरो री मेरो तुलसी को पेड़॥

क्या देवे बगिया क्या देवे खेत,

क्या देवे री मेरो तुलसी का पेड़,

हरि हरि बगिया हरो भरो खेत,

हरो भरो री मेरो तुलसी को पेड़॥

फुलवा देवी बगिया अन्न धन देवे खेत,

सुख शांति देवें मेरो तुलसी का पेड़,

हरि हरि बगिया हरो भरो खेत,

हरो भरो री मेरो तुलसी को पेड़॥

मंदिर में चढ़े फुलवा अन्न धन से भरे पेट,

कान्हा जी को प्यारो मेरो तुलसी को पेड़,

हरि हरि बगिया हरो भरो खेत,

हरो भरो री मेरो तुलसी को पेड़॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।