लक्ष्मी नाथ माने प्यारो लागे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन विष्णु भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

लक्ष्मी नाथ माने , प्यारो लागे,

चार भुजा रो नाथ,,,

'म्हारो, चित चरणों में राख xll'-ll

मोर मुकट, सिर छत्र विराजे,

कानों में थारे, कुण्डल साजे ll

ग़ल हीरों रो, हार हज़ारी,

भगतों ने हिवड़े लगाए,,,

'म्हारो, चित चरणों में राख xll'

लक्ष्मी नाथ माने,,,,,,,,,,,,,,,,,

रत्न सिँहासन, आप विराजो,

राधा रुक्मणि, संग में विराजे ll

चरन धोए, चरनामृत पीऊँ,

मगन रहूँ दिन रात,,,

'म्हारो, चित चरणों में राख xll'

लक्ष्मी नाथ माने,,,,,,,,,,,,,,,,,

माखन मिश्री रा, भोग लगाऊँ,

हाथ जोड़, तने अर्ज़ सुनाऊँ ll

सुबह शाम, थोरा दर्शन पाऊँ,

खुशियाँ मनाऊँ दिन रात,,,

'म्हारो, चित चरणों में राख xll'

लक्ष्मी नाथ मने,,,,,,,,,,,,,,,,,

दर्शन बिन दोए, अख्खियाँ प्यासी,

दरस देवो नी, द्वारिका रा वासी ll

रात दिन, थोरा गुण गाऊँ,

कर दो भव से पार,,,

'म्हारो, चित चरणों में राख xll'

लक्ष्मी नाथ माने,,,,,,,,,,,,,,,,,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।