मान्ने रंग दो नाथ थोरे रंग में

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन विष्णु भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मान्ने रंग दो नाथ, थोरे रंग में xll-ll

^हो म्हारा, ठाकुर लक्ष्मी रे नाथ,

म्हारे, सिर पर राखो हाथ l

मेरी नाथ वसो, म्हारे मन में,

मान्ने रंग दो नाथ, थोरे रंग में xll-ll

तेरा श्याम, रंग लागे प्यारा ll

मेरी आँखों ने, इसको निहारा l

हो अब तो, वस जाओ मेरे नयन में l

हो म्हारा ठाकुर,,,,,,,,,,,,,,,,,F

भोर भोर मैं, द्वारे आवाँ ll

चरणामृत, तुलसी पावाँ l

हो ऐसी लगन, लगाओ जीवन में l

हो म्हारा ठाकुर,,,,,,,,,,,,,,,,,F

थोरे रूप में, मैं खो जावाँ ll

जब चाहवाँ, मैं दर्शन पावाँ l

हो ऐसी ज्योत, जलाओ ह्रदय में l

हो म्हारा ठाकुर,,,,,,,,,,,,,,,,,F

प्रीत राज मैं, जाऊँ बलिहारी* ll

आया नाथ, शरण मैं तिहारी l

हो अब तो रख लो, थोरी शरण में,

हो म्हारा ठाकुर,,,,,,,,,,,,,,,,,F

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।