बँसी वाले ने पकड़ो हाथ

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

बँसी वाले ने, पकड़ो हाथ,

अब डर काहे को l

मुरली वाले ने, पकड़ो हाथ,

अब डर काहे को l

काहे को, डर काहे को ll

मुरली वाले ने,,, ll पकड़ो हाथ,

अब डर काहे को l

बरसानो, मेरो निज़ी गाँव है ll

^निज़ी गाँव है, निज़ी गाँव है l

*नन्द गाँव, मेरो ससुराल,

अब डर काहे को,,,

बँसी वाले ने,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

नंद बाबा, मेरे ससुर लगत हैं ll

^ससुर लगत हैं, ससुर लगत हैं l

यशोद्धा मईया, लगत मेरी सास,

अब डर काहे को,,,

बँसी वाले ने,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

बल दाऊ जी, मेरे जेष्ठ लगत हैं ll

^जेष्ठ लगत हैं, जेष्ठ लगत हैं l

सिर पे मेरे, धर दियो हाथ,

अब डर काहे को,,,

बँसी वाले ने,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

ग्वाल बाल, मेरे देवर लगत हैं ll

^देवर लगत हैं, देवर लगत हैं l

इन ने डारो, ढेरों गुलाल,

अब डर काहे को,,,

बँसी वाले ने,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

कृष्ण देव, मेरे पति लगत हैं ll

^पति लगत हैं, पति लगत हैं l

वोह तो तीनों, लोक के नाथ,

अब डर काहे को,,,

बँसी वाले ने,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।