ओम सुन्दरम ओंकार सुन्दरम

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

ओम सुन्दरम ओंकार सुन्दरम

शिव सुन्दरम शिव नाम सुन्दरम

ओम सुन्दरम ओंकार सुन्दरम

शिव सुन्दरम शिव नाम सुन्दरम

ओम नमः शिवाय

ओम नमः शिवाय

ओम वन्दनं ओंकार वन्दनं

शिव वन्दनं शिव नाम वन्दनं

शिव वन्दनं शिव नाम वन्दनं

शिव धाम वन्दनं

चन्द्रभाल शीश गंगधार सुन्दरम

नीलकंठ सर्प मुंडमाल सुन्दरम

चन्द्रभाल शीश गंगधार सुन्दरम

नीलकंठ सर्प मुंडमाल सुन्दरम

ओम सुन्दरम ओंकार सुन्दरम

शिव वन्दनं शिव नाम वन्दनं

शिव सुन्दरम शिव नाम सुन्दरम

शिव धाम वन्दनं

भूतप्रेतनाथ भूतनाथ सुन्दरम

जगतगुरु शिव शंकर काशीनाथ सुन्दरम

भूतप्रेतनाथ भूतनाथ सुन्दरम

जगतगुरु शिव शंकर काशीनाथ सुन्दरम

ओम सुन्दरम ओमकार सुन्दरम

शिव वन्दनं शिव नाम वन्दनं

शिव सुन्दरम शिव नाम सुन्दरम

शिव धाम वन्दनं

भस्म अंग रमाये भस्मीभूत सुन्दरम

अलख निरंजन सन्यासी अवधूत सुन्दरम

भस्म अंग रमाये भस्मीभूत सुन्दरम

अलख निरंजन सन्यासी अवधूत सुन्दरम

ओम सुन्दरम ओमकार सुन्दरम

शिव वन्दनं शिव नाम वन्दनं

शिव सुन्दरम शिव नाम सुन्दरम

शिव धाम वन्दनं

कर्पुगौरम संसार, सारं सुन्दरम

करुनावतारं भुजगेन्द्र हरम सुन्दरम

कर्पुगौरम संसार, सारं सुन्दरम

करुनावतारं भुजगेन्द्र हरम सुन्दरम

ओम सुन्दरम ओंकार सुन्दरम

शिव वन्दनं शिव नाम वन्दनं

शिव सुन्दरम शिव नाम सुन्दरम

शिव धाम वन्दनं

मंदार पुष्प चन्दन बिल्वपत्र सुन्दरम

शिवालय में शिवरूप शिवलिंग दर्शन सुन्दरम

मंदार पुष्प चन्दन बिल्वपत्र सुन्दरम

शिवालय में शिवरूप शिवलिंग दर्शन सुन्दरम

ओम सुन्दरम ओंकार सुन्दरम

शिव वन्दनं शिव नाम वन्दनं

शिव सुन्दरम शिव नाम सुन्दरम

शिव धाम वन्दनं

ओम नमः शिवाय

ओम नमः शिवाय

ओम के आधार शिवस्वरुप सुन्दरम

ओम नमः शिवाय मंत्र भूप सुन्दरम

ओम के आधार शिवस्वरुप सुन्दरम

ओम नमः शिवाय मंत्र भूप सुन्दरम

ओम सुन्दरम ओंकार सुन्दरम

शिव वन्दनं शिव नाम वन्दनं

शिव सुन्दरम शिव नाम सुन्दरम

शिव धाम वन्दनं

अर्धनारीश्वर दर्शन प्रणाम सुन्दरम

गौरी सूत गणेश को है ध्यान सुन्दरम

अर्धनारीश्वर दर्शन प्रणाम सुन्दरम

गौरी सूत गणेश को है ध्यान सुन्दरम

ओम सुन्दरम ओंकार सुन्दरम

शिव वन्दनं शिव नाम वन्दनं

शिव सुन्दरम शिव नाम सुन्दरम

शिव धाम वन्दनं

ओम सुन्दरम ओंकार सुन्दरम

शिव सुन्दरम शिव नाम सुन्दरम

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।