जिन्दगानियाँ

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

दे दो सहारा,

श्याम मैं जग से हारा,

कटती नहीं है जिन्दगानियाँ,

जैसे तैसे करके गिरते उठते,

यहाँ तक है पहुंचाई,

पर अब मुश्किल है बढ़ पाना,

थाम ले हाथ कलाई,

दे दों सहारा,

श्याम मैं जग से हारा।।

रहम थी मांगी मैंने,

हर एक द्वार से,

नहीं आया आगे कोई,

इस संसार से,

ये रीत है कैसी,

श्याम ये प्रीत है कैसी,

कैसी है सारी रिश्तेदारियां,

दे दों सहारा,

श्याम मैं जग से हारा,

कटती नहीं है जिन्दगानियाँ।।

बताई किसी ने मुझे,

तेरी राह मोहन,

मिलेगा किनारा चल जा,

श्याम की तू शरणम,

दे मिटा अँधेरा,

श्याम कर देगा सवेरा,

मेट दे सारी परेशानियां,

दे दों सहारा,

श्याम मैं जग से हारा,

कटती नहीं है जिन्दगानियाँ।।

‘राजू’ बना है जो भी,

श्याम दीवाना,

देता है उसको निश्चित,

श्याम ठिकाना,

देता है किनारा,

श्याम के दर जो हारा,

करता है उस पर मेहरबानियाँ,

दे दों सहारा,

श्याम मैं जग से हारा,

कटती नहीं है जिन्दगानियाँ।।

दे दो सहारा,

श्याम मैं जग से हारा,

कटती नहीं है जिन्दगानियाँ,

जैसे तैसे करके गिरते उठते,

यहाँ तक है पहुंचाई,

पर अब मुश्किल है बढ़ पाना,

थाम ले हाथ कलाई,

दे दों सहारा,

श्याम मैं जग से हारा........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।