मेरा अन्नदाता

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

ना चाहे मन्ने धन और दौलत,

ना लालच सै कोठी का,

मन्ने तो चिंता लागी सै,

मेरी बाबा रोजी रोटी का,

चिंता लागी सै,

मेरी बाबा रोजी रोटी का॥

सुबह खाऊँ तो रात की चिंता,

बाबा मेरे होरी सै,

बण बैठ्यो दातार तू बाबा,

या कैसी दातारी सै,

रूखी सूखी रोटी मिल ज्या,

शौक ना चूरमा बाटी का,

मन्ने तो चिंता लागी सै,

मेरी बाबा रोजी रोटी का,

चिंता लागी सै,

मेरी बाबा रोजी रोटी का॥

मतलब की है रिश्तेदारी,

या तो रीत पुरानी सै,

बिन मतलब ना पूछे कोई,

तेरे से ना छानी सै,

तू सै मेरा अन्न दाता,

क्यों माच्या टोटा रोटी का,

मन्ने तो चिंता लागी सै,

मेरी बाबा रोजी रोटी का,

चिंता लागी सै,

मेरी बाबा रोजी रोटी का॥

इकबर आकर देख ले बाबा,

कैसी हालत होगी सै,

सुरेश राजस्थानी की किस्मत,

क्यों बाबा सोगी सै,

इब तो आकर भाग्य जगा दे,

मेरी किस्मत खोटी का,

मन्ने तो चिंता लागी सै,

मेरी बाबा रोजी रोटी का,

चिंता लागी सै,

मेरी बाबा रोजी रोटी का॥

ना चाहे मन्ने धन और दौलत,

ना लालच सै कोठी का,

मन्ने तो चिंता लागी सै,

मेरी बाबा रोजी रोटी का,

चिंता लागी सै,

मेरी बाबा रोजी रोटी का........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।