तूने किया ना हरि से प्यार

पारंपरिक
विष्णु भगवान भजन विष्णु भजन vishnu
॥ पावन पाठ ॥

तूने किया ना हरि से प्यार,

सारा जीवन दीन्हा गुज़ार,

तेरी ये नादानी है ओ रे मनुआ,

तेरी ये कहानी है ओ रे मनुआ॥

तुमने पाया जो तन,

फिर ना पाओगे प्यारे दुवारा,

तेरा हीरा जीवन,

बीता जाता है सारा का सारा,

माया में रे काहे तू लिपटlनी है,

ओ रे मनुआ....

तेरे दुख का कारण,

तेरी प्रभु के प्रति बेरुखी है,

जो प्रभु के रंग में,

रंग गया तो बो ही सुखी है,

समझ ना जो उसको,

वो अज्ञानी है ।।

ओ रे मनुआ....

अरे कर्म कर तू ऐसे,

जिससे सुधरे ये जीवन तुम्हारा,

अरे जन्म और मरण से,

मिल जाएगा रे छुटकारा,

‘राजेन्द्र’ की बात नही,

संतो की बानी है ।।

ओ रे मनुआ.....

तूने किया ना हरि से प्यार,

सारा जीवन दीन्हा गुज़ार,

तेरी ये नादानी है ओ रे मनुआ,

तेरी ये कहानी है ओ रे मनुआ॥

गायक /गीतकार-राजेन्द्र प्रसाद सोनी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।