कर लेना तुम भजन राम का

पारंपरिक
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

कर लेना तुम भजन राम का, भव से पार उतर जाओगे,

मोह माया के इस चक्कर से, पल में बाहर निकल जाओगे॥

इन आंखों की आदत बुरी है, ताका झांकी करती है,

इनसे कराओ दर्श राम के, भव से पर उतर जाओगे,

कर लेना तुम भजन राम का, भव से पार उतर जाओगे,

मोह माया के इस चक्कर से, पल में बाहर निकल जाओगे॥

इन कानों की आदत बुरी है, इधर उधर की सुनते है,

इन कानों की आदत बुरी है, चुगली सुनते फिरते है,

इनको सुनाओ भजन राम के, भव से पार उतर जाओगे,

कर लेना तुम भजन राम का, भव से पार उतर जाओगे,

मोह माया के इस चक्कर से, पल में बाहर निकल जाओगे॥

इस जिभ्या ‌की आदत बुरी है, चुगली करती फिरती है,

इस जिभ्या ‌की आदत बुरी है, सबकी चुगली करती है,

इससे गवांऔ भजन राम के, भव से पार उतर जाओगे,

कर लेना तुम भजन राम का, भव से पार उतर जाओगे,

मोह माया के इस चक्कर से, पल में बाहर निकल जाओगे॥

इन हाथों की आदत बुरी है, मारा पीटी करते हैं,

इनसे जलाओ दीप राम के, भव से पार उतर जाओगे,

कर लेना तुम भजन राम का, भव से पार उतर जाओगे,

मोह माया के इस चक्कर से, पल में बाहर निकल जाओगे॥

इन पैरों की आदत बुरी है, घर घर घूमा फिरते हैं,

इनसे जाओ मंदिर राम के, भव से पार उतर जाओगे,

कर लेना तुम भजन राम का, भव से पार उतर जाओगे,

मोह माया के इस चक्कर से, पल में बाहर निकल जाओगे॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।