छठी मईया बुलावे

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

बन परदेसिया जे गइला शहर तू,

बिसरा के लोग आपन गाँव के घर तू,

उहे घरवा उहे गलियां पुकारे,

छठी मईया रस्ता निहारे,

जय हो छठी मईया,

बुलावे छठी मईया।

अंगना में जीजी संग मौसी,

छठी माई के गीत गाये,

सज धज के नइकी दुलहिन,

पर्व के ठेकुआ बनाये,

हे छठी मईया होना सहाए,

हे छठी मईया होना सहाए॥

बाबू जी गेलथुन केलवा किनाये,

पटना बजरवा से नेमुआ ले आये,

फ़लवा से बबुनी बहँगी सजाये,

फ़लवा के भरवा से लचकत जाये,

बहँगी लचकत जाये,

बहँगी लचकत जाये,

पानी में खड़ा होके वर्ती,

मांगे आशीष अपार,

सबके सुहागिन रखिह,

दीहा उमिर हजार,

दीहा उमिर हजार,

हे दीनानाथ सुन ली पुकार,

हे दीनानाथ विनती हमार,

हे दीनानाथ सुन ली पुकार........

पूरा जग से हारे, आये तेरे द्वारे,

सुना हैं कि छठी मां भाग सवारे.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।