काँच ही बाँस के बहंगिया

अनुराधा पौडवाल
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

काँच ही बाँस के बहंगिया,

बहंगी लचकत जाए,

होई ना बलम जी कहरिया,

बहंगी घाटे पहुचाएं,

काँच ही बाँस के बहंगिया,

बहंगी लचकत जाए।

बाट जे पूछेला बटोहिया,

बहंगी केकरा के जाए,

तू तो आन्हर होवे रे बटोहिया,

बहंगी छठ मईया के जाए,

उन्हावे जे बारी छठी मईया,

बहंगी उनका के जाए।

काँच ही बाँस के बहंगिया,

बहंगी लचकत जाए,

होई ना बलम जी कहरिया,

बहंगी घाटे पहुचाएं,

उन्हावे जे बारी छठी मईया,

बहंगी उनका के जाए।

बाट जे पूछेला बटोहिया,

बहंगी केकरा के जाए,

तू तो आन्हर होवे रे बटोहिया,

बहंगी छठ मईया के जाए,

उन्हावे जे बारी छठी मईया,

बहंगी उनका के जाए।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।