वाणी से हरदम यही गीत गाऊं

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी,

हे नाथ नारायण वासुदेवा,

हे नाथ नारायण वासुदेवा,

हे नाथ नारायण वासुदेवा......

हाथों से संतों की सेवा कराऊ,

पैरों से चलकर मैं वृंदावन जाऊं,

वाणी से हरदम यही गीत गाऊं,

हे नाथ नारायण वासुदेवा.......

गीता पढ़ु और गीता सुनु मैं,

गीता की चर्चा घर-घर करूं मैं,

गीता हमारी है वेद माता,

हे नाथ नारायण वासुदेवा......

गंगा किनारे मैं कुटिया बनाऊं,

गंगा नहाऊं और गंगाजल पियू,

गंगा किनारे मैं दीपक जलाऊ,

हे नाथ नारायण वासुदेवा.......

मधुबन में जाके मैं धूनी रमाऊ,

करके तपस्या मैं तन को समारू,

वाणी से हरदम यही गुनगुनाऊ,

हे नाथ नारायण वासुदेवा.......

सखियों को साथ ले मंदिर में जाऊं,

मंदिर में जाके हरि गुण गांऊ,

हरि गुण गाके मैं जीवन समारू,

हे नाथ नारायण वासुदेवा......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।