आओ रे गणराज गौरी के लाल

पारंपरिक
हनुमान जी भजन गणेश भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

आओ रे गणराज गौरी के लाल,

आओ रे गणराज गौरी के लाल,

हम दीन है दाता तुम दीनदयाल,

हम दीन है दाता तुम दीनदयाल,

सुनता ना कोई और दुखियों का हाल,

सुनता ना कोई और दुखियों का हाल,

हम दीन है दाता तुम दीनदयाल,

हम दीन है दाता तुम दीनदयाल।

तूने भवसागर से नैया को निकाला,

जो भी तेरे शरण आया उसको संभाला,

सिद्धिविनायक तू सिद्ध काज करता,

तू संकटमोचन है संकटो का हर्ता,

सबको संभाला जैसे हमे भी संभाल,

सबको संभाला जैसे हमे भी संभाल,

हम दीन है दाता तुम दीनदयाल,

हम दीन है दाता तुम दीनदयाल।

रिद्धि सिद्धि वाला तू चार भुजाधारी,

आ भी जाओ करके अब मूष पे सवारी,

तुझे ऋषि मुनियो ने दिन रैन पूजा,

तुझसा अभय दानी सृष्टि में ना दूजा,

तूने किये पूरे है सबके सवाल,

तूने किये पूरे है सबके सवाल,

हम दीन है दाता तुम दीनदयाल,

हम दीन है दाता तुम दीनदयाल,

सुनता ना कोई और दुखियों का हाल,

हम दीन है दाता तुम दीनदयाल।

जो भी तेरे भक्ति में खुद को है डुबोता,

उसका कभी भूल के अमंगल ना होता,

हम भी निर्दोष तेरे छोटे से पुजारी,

कभी सुध ले लो हे गणेश्वर हमारी,

थोड़ा बहुत कर ले तू हमारा खयाल,

थोड़ा बहुत कर ले तू हमारा खयाल,

हम दीन है दाता तुम दीनदयाल,

हम दीन है दाता तुम दीनदयाल।

आओ रे गणराज गौरी के लाल,

आओ रे गणराज गौरी के लाल,

हम दीन है दाता तुम दीनदयाल,

हम दीन है दाता तुम दीनदयाल........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।