माए नी मेरा हो गया गिरधर नाल ब्याह

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

माए नी मै तुर चली आ अपने श्याम दे नाल,

माए नी मेरा हो गया गिरधर दे नाल ब्याह,

माए नी मै तुर चली आ अपने श्याम दे नाल,

ऐना सोहना मैनु घर बार मिलिया,

मनवा मेरा खिड़ खिड़ खिड़िया,

श्याम सुंदर नाल तुर मै जाना,

ओ होर नही कोई चाह,

माए नी मेरा हो गया गिरधर नाल ब्याह ॥

ला मेंहदी मै दुलहन बन जावा,

परोहणा तेरा बन के आवा,

श्याम सुंदर जदो लैन जे आए,

मैनु चाई चाई डोली बीच पा,

माए नी मेरा हो गया गिरधर नाल ब्याह ॥

मै गिरधर दी गिरधर मेरा,

जन्म जन्म दा साथी मेरा,

गिरिधर दे नाल तुर मैं जाना,

सब सखिया नु छड के जाना,

मैनु होर ना कोई चाह,

माए नी मेरा हो गया गिरधर नाल ब्याह ॥

पुछदिया ने मैनु सारी सखिया,

रस भरिया क्यों तेरी अखिया,

मोहन मेरा वृंदावन वासी,

मैं हाँ उसदी जान,

माए नी मेरा हो गया गिरधर नाल ब्याह ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।