मेरे मन में पारसनाथ

पारंपरिक
माँ गंगा भजन जैन भजन ganga
॥ पावन पाठ ॥

मेरे मन में पारसनाथ,

तेरे मन में पारसनाथ,

रोम रोम में समाया पारसनाथ रे,

रोम रोम में समाया पारसनाथ रे,

मेरी साँसों में समाया पारसनाथ रे,

मेरे मन मे पारसनाथ।।

जैसे फूलों में सुगन्ध,

जैसे कलियों में है रंग,

कतरे कतरे में समाया पारसनाथ रे,

मेरी साँसों में समाया पारसनाथ रे,

मेरे मन मे पारसनाथ।।

जैसे नदियों में है गंगा,

जैसे नभ में चमके सोहे,

पत्ते पत्ते पे लिखा है पारसनाथ रे,

मेरी साँसों में समाया पारसनाथ रे,

मेरे मन मे पारसनाथ।।

जैसे शंखेश्वर में धाम,

जैसे जीरावला में धाम,

जैसे लोदरवा में धाम,

जैसे नेरुल नगर में धाम,

जैसे नागेश्वर में धाम,

जैसे नाकोड़ा बिराजे पारसनाथ रे,

मेरी साँसों में समाया पारसनाथ रे,

मेरे मन में पारसनाथ,

तेरे मन में पारसनाथ,

रोम रोम में समाया पारसनाथ रे,

रोम रोम में समाया पारसनाथ रे,

मेरी साँसों में समाया पारसनाथ रे........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।