बहारों फूल बरसाओं मेरे गुरुदेव आयें हैं

पारंपरिक
विष्णु भगवान भजन गुरुदेव भजन vishnu
॥ पावन पाठ ॥

बहारों फूल बरसाओं, मेरे गुरुदेव आयें हैं,

भक्ति के पुष्प बरसाओ, मेरे गुरुदेव आयें हैं,

बहारों फूल बरसाओं, मेरे गुरुदेव आयें हैं॥

जिधर को नज़र जाती है, नजारें ही नजारें हैं,

श्री गुरुदेव के चरणों में, सहारे ही सहारे है,

गुनाहों तुम ना शर्माओं, ये बख्शनहार आयें है,

बहारों फूल बरसाओं, मेरे गुरुदेव आयें हैं॥

गुरु ब्रम्हा, गुरु विष्णु, गुरु ही महेश हैं मेरे,

गुरु स्वामी, गुरु मालिक, गुरु देवता है बस मेरे,

चरण रज़ शीश पे लगाओ, मेरे गुरु देव आयें है,

बहारों फूल बरसाओं, मेरे गुरुदेव आयें हैं॥

मुकद्दर आज़माना है, यहाँ आज़मा कर देखो,

ये किस्मत को बदल देंगे, इन्हें अपना कर के देखों,

ये झोलियाँ पल में भर देंगे, दया भंडार आयें है,

बहारों फूल बरसाओं, मेरे गुरुदेव आयें हैं॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।