शिव शंकर भजले मनवा

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

शिव शंकर भज ले मनवा, शिव शंकर,

यह जीवन, एक बंधन है, मोह ना कर,

शिव शंकर भज ले मनवा, शिव शंकर,

यह जीवन, एक बंधन है, मोह ना कर,

एक दिन उड़ जायेगा, जीव यह पिंजरा तोड़ कर,

शिव शंकर भज ले मनवा, शिव शंकर।

शीश पे गंगा बिराजे, भाल सोहे चंद्रमा,

तीन नेत्र विशाल बाहु, बाएं बैठी माँ उमा,

बैठे प्रभु कैलाश पर, ध्यान में आठों पहर, सृष्टि पर डाले नज़र,

शिव शंकर भज ले मनवा, शिव शंकर।

लोक तिहु चौदा भुवन, चर अचर सृष्टि सृजन,

आपकी माया है प्रभु, चंद्र सूर्य धरा गगन,

शम्भू ही ओमकार है, शम्भू ही साकार है, शम्भू ही आधार है,

शिव शंकर भज ले मनवा, शिव शंकर,

यह जीवन, एक बंधन है, मोह ना कर

एक दिन तो उड़ जायेगा, जीव यह पिंजरा तोड़ कर,

शिव शंकर भज ले मनवा, शिव शंकर......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।