नाथ मैं तो हार गयी

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

नाथ मैं तो हार गई घोटत भांग तुम्हारी,

हम तो हुए पराए स्वामी, भांग लगे तुम्हें प्यारी,

नाथ मैं तो हार गई घोटत भांग तुम्हारी॥

हरी हरी भांग की बूटी देखो, सौतन बनी हमारी,

जंगल झाड़ दिखा दिए तुमने, काट काट मैं तो हारी,

नाथ मैं तो हार गई घोटत भांग तुम्हारी,

हम तो हुए पराए स्वामी, भांग लगे तुम्हें प्यारी,

नाथ मैं तो हार गई घोटत भांग तुम्हारी॥

तुम तो हो अलगस्ट भांग में, शिव भोले भंडारी,

राम नाम तुम दिन भर जपते, मैं मंदिर रखवाली,

नाथ मैं तो हार गई घोटत भांग तुम्हारी,

हम तो हुए पराए स्वामी, भांग लगे तुम्हें प्यारी,

नाथ मैं तो हार गई घोटत भांग तुम्हारी॥

भांग घोटत मेरी बईया दुखे, दुखत हाथ हमारे,

पीपी भांग रहो मस्ती में, सुद मेरी बिसराई,

नाथ मैं तो हार गई घोटत भांग तुम्हारी,

हम तो हुए पराए स्वामी, भांग लगे तुम्हें प्यारी,

नाथ मैं तो हार गई घोटत भांग तुम्हारी॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।