जगराते की पावन ये रात

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

शेरांवाली जय मैया,

जोतावाली जय मैया,

जगराते की पावन ये रात,

माँग लो मैया से कोई सौगात,

बड़ी वरदानी है शेरोवाली ये माँ,

दुर्गा है भवानी है ज्योतावाली ये माँ।।

आते है नवराते,

माँ भक्तो के घर में है आती,

लाती है खजानें,

माँ जी भर के ख़ुशियाँ लुटाती,

शेरांवाली जय मैया,

ज्योतावाली जय मैया,

भक्तों पे ममता की,

दौलत लुटाती है, शेरोवाली ये माँ,

दुर्गा है भवानी है ज्योतावाली ये माँ।

वेदों ने भी माँ की,

बड़ी महिमा बताई है जग को,

संतो ने भी गाथा,

श्रद्धा से सुनाई है जग को,

शेरांवाली जय मैया,

ज्योतावाली जय मैया,

आता जो चौखट पर,

गले से लगाती है, शेरोवाली ये माँ,

दुर्गा है भवानी है ज्योतावाली ये माँ।

तीनों लोक में ही,

आदि शक्ति का जलवा समाया,

डेरा पर्वतों पर,

अम्बे जगदम्बे ने है लगाया,

शेरांवाली जय मैया,

ज्योतावाली जय मैया,

चौखानी बिगड़ी को,

पल में बनाती है, शेरोवाली ये माँ,

दुर्गा है भवानी है ज्योतावाली ये माँ।

जगराते की पावन ये रात,

माँग लो मैया से कोई सौगात,

बड़ी वरदानी है शेरोवाली ये माँ,

दुर्गा है भवानी है ज्योतावाली ये माँ।।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।