गोवर्धन परिक्रमा लगाई मैंने रात

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मेरा तनक पकड़ ले हाथ हो हाथ,

सिडीन पै चढ़ाए ले बनवारी....-4

मेरे पैरो में छाले पड़े हुए,

परिक्रमा लगाई मैंने रात हो रात,

सिडीन पै चढ़ाए ले बनवारी,

मेरा तनक पकड़ ले हाथ हो हाथ,

सिडीन पै चढ़ाए ले बनवारी॥

मेरे हाथ ब्रिज के थके हुए,

मैंने दान की सारी रात हो रात,

सिडीन पै चढ़ाए ले बनवारी,

मेरा तनक पकड़ ले हाथ हो हाथ,

सिडीन पै चढ़ाए ले बनवारी॥

मेरी जीभ ब्रिज की थकी हुई,

मैंने भजन सुनाए सारी रात हो रात,

सिडीन पै चढ़ाए ले बनवारी,

मेरा तनक पकड़ ले हाथ हो हाथ,

सिडीन पै चढ़ाए ले बनवारी॥

मेरे कान ब्रिज के थके हुए,

मैंने भजन सुने सारी रात हो रात,

सिडीन पै चढ़ाए ले बनवारी,

मेरा तनक पकड़ ले हाथ हो हाथ,

सिडीन पै चढ़ाए ले बनवारी॥

मेरे नैन ब्रिज के थके हुए,

मैंने दर्श किये सारी रात हो रात,

सिडीन पै चढ़ाए ले बनवारी,

मेरा तनक पकड़ ले हाथ हो हाथ,

सिडीन पै चढ़ाए ले बनवारी॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।