जय छठी मैया

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

सबे वरत करत,

ऐ धनी तुहूं कर,

मर जनी मन आशो,

भाऊजी कोशी भर,

रुका देवारू दौरा सरिया लि,

की चला भाऊजी हाली हाली,

सुरुज देखहिहें लाली,

की चल धनी हाली हाली,

सुरुज देखहिहें लाली।

पेन्ही ला पियारिया,

बनही ला पगड़िया,

दौरा सजल बा कर,

चला के तैयरिया,

उखिया तू लैला हाथे,

तुहूं चला साथे-साथे,

तेवारी के भीड़ ना ता,

बढ़ जायी छठी घाटे,

ठीक रौआ कह तानी,

हय धरी ना लोटा के पानी,

दीयरी ना बूते घिवा डाली,

की चला भाऊजी हाली हाली,

सुरुज देखहिहें लाली,

की चल धनी हाली हाली,

सुरुज देखहिहें लाली।

लेई ला अरग हाथे,

लावा ध्यान्वा,

पाके दर्शन,

प्रशन होई मनवा,

छठी के वरतिया,

भईल सफल हो,

हर साल पर्व करब,

अरे सुरज मल हो,

धन हम भैनी जी,

पूजा राउर कैनी जी,

हथवा में लेके आरती के थाली,

की चला भाऊजी हाली हाली,

सुरुज देखहिहें लाली,

की चल धनी हाली हाली,

सुरुज देखहिहें लाली।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।