जुग जुग जियसु ललनवा

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

जुग जुग जियसु ललनवा,

भवनवां के भाग्य जागल हो,

ललना लाल होई हैं,

कुलवा के दीपक,

मनवा में आस लागल हो॥

आजु के दिनवां सुहावन,

रतिया लुभावन हो,

ललना दिदिया के होरिलवा जन्में ले हो,

होरिलवा बड़ा सुन्दर हो,

हो ललना दिदिया के होरिलवा जन्में ले हो,

होरिलवा बड़ा सुन्दर हो।

नकिया त हवे जैसे बाबुजी के,

अंखिया ह माई के हो,

ललन मुहवाह,

चनवा सुरुजवात

सगरो अन्जोर भइले हो,

हो ललन मुहवाह,

चनवा सुरुजवात,

सगरो अन्जोर भइले हो,

जुग जुग जियसु ललनवा......

सासु सुहागिन बड भागिन,

अन धन लुटावेली हो,

ललना दुअरा पे बाजेला बधइया,

अन्गनवा उठे सोहर हो,

हो ललना दुअरा पे बाजेला बधइया,

अन्गनवा उठे सोहर हो।

नाची नाची गावेली बहिनिया,

ललन के खेलावेली हो,

ललना हंसी हंसी टिहुकी चलावेली,

रस बरसावेली हो,

हो ललना हंसी हंसी टिहुकी चलावेली,

रस बरसावेली हो,

जुग जुग जियसु ललनवा......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।