जितने तारे अंबर में

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

जितने तारे अंबर में मेरी चुनरी में जड़वा दे ओ,

मेरे भोले भंडारी मेरी लहंगा चुनरी लाई दे ओ॥

रोटी बनाओ शर्म लागे मेरे घर होटल खुल वायदे ओ,

मेरे भोले भंडारी मेरी लहंगा चुनरी लाई दे ओ॥

पानी खीचू शर्म लागे मोहे, घर सिमरी लगवाए दे ओ,

मेरे भोले भंडारी मेरी लहंगा चुनरी लाई दे ओ॥

कपड़े धो शर्म लगे मोहे, मेरे घर धोबी भी लगवा दे ओ,

मेरे भोले भंडारी मेरी लहंगा चुनरी लाई दे ओ॥

गोबर उठा हूं शर्म लगे, मेरे घर भंगी लगवाए दे,

मेरे भोले भंडारी मेरी लहंगा चुनरी लाई दे ओ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।