आनंदित रहो प्रभु में आनंदित रहो

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

आनंदित रहो प्रभु में आनंदित रहो,

मैं फिर से कहता हूँ सदा आनंदित रहो॥

जब तुम्हारा मन बोझिल हो,

चलते चलते थक गये हो,

अपना बोझ प्रभु पर डाल दो,

उसको है तुम्हारा खयाल,

आनंदित रहो प्रभु में आनंदित रहो.......

जब तुम्हारा प्राण व्याकुल हो,

जीवन में निराशा हो,

रखो अपना भरोसा प्रभु पर,

जीवन को आनंद से भरेगा,

आनंदित रहो प्रभु में आनंदित रहो.......

जब तुम्हें लोग सताया करें,

मेरे कारण तुम्हारी निंदा हो,

हिम्मत ना हारो सब कुछ सह लो,

स्वर्ग में है तुम्हारा बड़ा प्रतिफल,

आनंदित रहो प्रभु में आनंदित रहो.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।