ना झटको जुल्फ से गंगा

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

ना झटको जुल्फ से गंगा,

हमारी गौरा भीग जाएगी,

भोले के माथे का चंदा,

गौरा की बिंदिया में चमका,

चमक यह कैसे दमकेगी,

नजारा हम भी देखेंगे,

नजारा हम भी देखेंगे,

नजारा तुम भी देखोगे।

गले में सर्पों की माला,

गौरा के घरवा से उलझी,

यह उलझन कैसे सुलझेगी,

नजारा हम भी देखेंगे,

नजारा हम भी देखेंगे,

नजारा तुम भी देखोगे।

भोले के हाथ के डमरु,

गौरा के कंगना से उलझा,

यह उलझन कैसे सुलझेगी,

नजारा हम भी देखेंगे,

नजारा हम भी देखेंगे,

नजारा तुम भी देखोगे।

भोले के पैर के घुंघरू,

गौरा की पायल से उलझे,

यह उलझन कैसे सुलझेगी,

नजारा हम भी देखेंगे,

नजारा हम भी देखेंगे,

नजारा तुम भी देखोगे।

भोले के संग में गौरा,

गौरा की गोद में गणपत,

तीनों का मेल है कैसा,

नजारा हम भी देखेंगे,

नजारा हम भी देखेंगे,

नजारा तुम भी देखोगे।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।