सदा मै स्तुति करूँगा

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॥ पावन पाठ ॥

सदा मै स्तुति करूँगा,

सदा मै सेवा करूँगा,

मुझे बचाया येशु ने,

सदा मै स्तुति करूँगा ॥

जब मै निराशा मे था,

तुने मुझे आशा दी,

जगत मे आया, जीवन है दिया,

मुझे बचाने को,

सदा मै स्तुति करूँगा,

सदा मै सेवा करूँगा,

मुझे बचाया प्रभु ने,

सदा मै स्तुति करूँगा ॥

प्रेमी प्रभु येशु,

तुने बचाया मुझे,

देता हूँ मैं अपना सारा जीवन,

संपूर्ण आनंद से,

सदा मै स्तुति करूँगा,

सदा मै सेवा करूँगा,

मुझे बचाया प्रभु ने,

सदा मै स्तुति करूँगा ॥

अनादी परमेश्वर,

सच्चाई, जीवन है तू,

स्तुति प्रशंसा करता रहूँगा,

अपने जीवन में,

सदा मै स्तुति करूँगा,

सदा मै सेवा करूँगा,

मुझे बचाया प्रभु ने,

सदा मै स्तुति करूँगा ॥

मुझे बचाने आया,

जब मैं गुनाहों में था,

स्वर्ग को छोड़ कर, जगत मे आया

मुझे बचाने को,

सदा मै स्तुति करूँगा,

सदा मै सेवा करूँगा,

मुझे बचाया प्रभु ने,

सदा मै स्तुति करूँगा ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।