गौरा तेरी शादी भोले से हो रही

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

आसमान से फूलो की बरसात हो गई,

गौरा तेरी शादी भोले से हो गई॥

गंगा कहे मैं बड़ी जमना कहे मैं बड़ी,

अरे काहे की बड़ी मेरी जटा में पड़ी....-2

गौरा तेरी शादी भोले से हो गई,

आसमान से फूलो की बरसात हो गई,

गौरा तेरी शादी भोले से हो गई॥

चंदा कहे मैं बड़ा सूरज कहे मैं बड़ा,

अरे काहे का बड़ा मेरे माथे पे लगा...-2

गौरा तेरी शादी भोले से हो गई,

आसमान से फूलो की बरसात हो गई,

गौरा तेरी शादी भोले से हो गई॥

नाग बोले मैं बड़ा सर्प बोले मैं बड़ा,

अरे काहे का बड़ा मेरे गले में पड़ा....-2

गौरा तेरी शादी भोले से हो रही,

आसमान से फूलो की बरसात हो गई,

गौरा तेरी शादी भोले से हो गई॥

ढ़ोलक कहें मैं बड़ा डमरू कहें मैं बड़ा,

अरे काहे का बड़ा मेरे हाथो में पड़ा....-2

गौरा तेरी शादी भोले से हो रही,

आसमान से फूलो की बरसात हो गई,

गौरा तेरी शादी भोले से हो गई॥

बैल बोले मैं बड़ा नंदी बोले मैं बड़ा,

काहे का बड़ा मेरे चरणों में पड़ा....-2

गौरा तेरी शादी भोले से हो रही,

आसमान से फूलो की बरसात हो गई,

गौरा तेरी शादी भोले से हो गई॥

गणपत बोले मैं बड़ा कार्तिक बोले मैं बड़ा,

काहे का बड़ा मेरी गोदी में पड़ा.....-2

गौरा तेरी शादी भोले से हो रही,

आसमान से फूलो की बरसात हो गई,

गौरा तेरी शादी भोले से हो गई॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।