जन्म जन्म का साथ है

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

आप अमर हो, मैं मर जाती लेकर नाम तुम्हारा,

जन्म जन्म का साथ है हमारा और तुम्हारा॥

पहली बार मैं जन्मी दक्ष सुता कहलाए,

तुम्हें पाने की खातिर अपनी देह जलाई,

हवन कुंड में कूद पड़ी लेकर नाम तुम्हारा,

जन्म जन्म का साथ है हमारा और तुम्हारा॥

दूजी बार मैं जन्मी मेना माथ हमारी,

तुम्हें पाने की खातिर करी तपस्या भारी,

बेलपत्र खा खाकर मैंने बरसों किया गुजारा,

जन्म जन्म का साथ है हमारा और तुम्हारा॥

पिता हमारे बोले श्री हरि से मैं भ्याऊंगी,

मैं बोली ना ब्याह करूं चाहे कुंवारी मर जाऊंगी,

भोले बिन तो इस दुनिया में होगा नहीं गुजारा,

जन्म जन्म का साथ है हमारा और तुम्हारा॥

जब तक सूरज धरती अंबर चाँद सितारे,

तब तक भोले हम तो रहेंगे सदा तुम्हारे,

मिलो अगर ना इस जीवन में लेंगे जन्म दोबारा,

जन्म जन्म का साथ है हमारा और तुम्हारा॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।