दीपों का त्योंहार हम मनाने आए हैं

पारंपरिक
श्री गणेश भजन गणेश भजन ganesh
॥ पावन पाठ ॥

सिद्धि विनायक गणपति को,

रिझाने आये हैं,

दीपों का त्योंहार,

हम मनाने आए हैं।।

जब से तुम कलकत्ता पधारे,

हो गए सबके वारे न्यारे,

प्रथम तुम्हारी होती पूजा,

तुमसे बढ़कर देव ना दूजा,

तेरे चरणों में...

तेरे चरणों में, शीश झुकाने आए हैं,

दीपों का त्योंहार,

हम मनाने आए हैं।।

रिद्धि सिद्धि के तुम हो दाता,

भक्तों के तुम भाग्य विधाता,

शुभ और लाभ को देने वाले,

भक्तों के दुःख को हरने वाले,

अपनी किस्मत को,

अपनी क़िस्मत को, चमकाने आए हैं,

दीपों का त्योंहार,

हम मनाने आए हैं।।

नए साल का बही और खाता,

तेरे नाम पे लक्ष्मी दाता,

तेरे साथ शुरआत करेंगे,

सपने सारे पुरे करेंगे,

श्याम के संग में हम,

श्याम के संग में हम, भोग लगाने आए हैं।

सिद्धि विनायक गणपति को,

रिझाने आये हैं,

दीपों का त्योंहार,

हम मनाने आए हैं........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।