तुलसा घूम रही ब्रज धाम

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन विविध भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

तुलसा घूम रही ब्रज धाम जाने कहां मिलेंगे श्याम....-2

जब तुलसा जमुना तट आई,

राधा सखियों के संग आई,

गोता लगा रहे घनश्याम, तुलसा यही मिलेंगे श्याम,

तुलसा घूम रही ब्रज धाम जाने कहां मिलेंगे श्याम॥

जब तुलसा मधुबन में आई,

राधा सखियों के संग आई,

गैया चरा रहे घनश्याम, तुलसा यही मिलेंगे श्याम,

तुलसा घूम रही ब्रज धाम जाने कहां मिलेंगे श्याम॥

जब तुलसा बंसीवट आई,

राधा सखियों के संग आई,

मुरली बजा रहे घनश्याम, तुलसा यही मिलेंगे श्याम,

तुलसा घूम रही ब्रज धाम जाने कहां मिलेंगे श्याम॥

जब तुलसा वृंदावन आई,

राधा सखियों के संग आई,

वहां पर रास रचावे घनश्याम, तुलसा यही मिलेंगे श्याम,

तुलसा घूम रही ब्रज धाम जाने कहां मिलेंगे श्याम॥

कार्तिक मास तुलसा घर घर आई,

सब सखियां मिल मंगल गाए,

वहां पर मिल गए सालेग़ाव, तुलसा यही मिलेंगे श्याम,

तुलसा घूम रही ब्रज धाम जाने कहां मिलेंगे श्याम......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।