नाकोंडा में पार्श्व प्रभु का द्वारा है

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॥ पावन पाठ ॥

तर्ज - हारे हारे हारे तुम हारे के सहारे

मेवानगर में पार्श्व प्रभु का द्वारा है,

ऐसा लगता जमी पे स्वर्ग उतारा है,

चारो ओर ही गूंज रहे जयकारे,

आओ प्रभु से मिले...

आया.. आया.. आया.. मैं धाम नाकोंडा आया,

लाया .. लाया.. लाया.. मैं भक्तो को संग लाया ॥

माँ वामा के लाल, दीनदयाल,

दरबार तेरा है ये विशाल,

आता शरण मे जो भी तेरी,

कर देता दादा तू उनको निहाल,

निशदिन करता है तू कृपा,

आया.. आया.. आया.. मैं धाम नाकोंडा आया,

लाया .. लाया.. लाया.. मैं भक्तो को संग लाया ॥

प्रभु पार्श्व के सेवक है जो प्यारे,

वो काला गोरा भैरव हमारे,

पार्श्व की आज्ञा में रहके जो करते,

कलयुग में भक्तो के वारे न्यारे,

एक नजर हमपे भी कर जरा,

आया.. आया.. आया.. मैं धाम नाकोंडा आया,

लाया .. लाया.. लाया.. मैं भक्तो को संग लाया ॥

छोड़ेगे ना हम तेरा दरबार,

कहता है ये टुकलिया परिवार,

‘प्रवीण नैतिक’ पर करो उपकार,

छुटे ना " दिलबर " से तेरा द्वार,

बड़े अनमोल है ये पल....

आया.. आया.. आया.. मैं धाम नाकोंडा आया,

लाया .. लाया.. लाया.. मैं भक्तो को संग लाया ॥

मेवानगर में पार्श्व प्रभु का द्वारा है,

ऐसा लगता जमी पे स्वर्ग उतारा है,

चारो ओर ही गूंज रहे जयकारे,

आओ प्रभु से मिले...

आया.. आया.. आया.. मैं धाम नाकोंडा आया,

लाया .. लाया.. लाया.. मैं भक्तो को संग लाया ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।