दस वे कन्हैया केडी नवी शरारत कीत्ति हैं

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

दस वे कन्हैया केडी नवी शरारत कीत्ति हैं

किदा किदा माखन खादा कीदी लस्सी पीत्ति है

इक गवाँडन कैँदी मेरा सारा माखन खा गया

दूजी गवाँडन कैँदी मेरी सारी लस्सी पी गया

तीजी गवाँडन कैँदी मेरी मटकी फोड दीत्ति है

इक गवाँडन कैँदी मैनू जाँदी नू है टोकदा

दूजी गवाँडन कैँदी मेरा रस्ता है रोकदा

तीजी गवाँडन कैँदी मेरी चुनरी वी खीँची है

नन्द बाबा जेडा तेरा पँचा दे विच बैँदा ए

पँचा दे विच बैके ओ ता नित्त उलाहने सैँदा ए

तेरया उलाबँयाने हद कर दीत्ति ए

मात यशोदा मै ना कोई शरारत कीत्ति है

सखियाँ ने झूठ बोल हद कर दीत्ति है

ना मैं किसे दा माखन खादा ना मैं लस्सी पीत्ति है

दस वे कन्हैया

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।