सिया ठाडी जनक दरबार

पारंपरिक
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

सिया ठाडी जनक दरबार,

सूरज को लौटा धार रही॥

सीता मांगन होय सोई मांग,

तपस्या पूर्ण आज हुई॥

सिया ठाडी जनक दरबार,

सूरज को लौटा धार रही॥

मैंने मांगो अयोध्या को राज,

सरयू जी मांगी नहावे को॥

सिया ठाडी जनक दरबार,

सूरज को लौटा धार रही॥

मैंने मांगी कौशल्या सी सास,

ससुर राजा दशरथ से॥

सिया ठाडी जनक दरबार,

सूरज को लौटा धार रही॥

मैंने चर्त भरत देवर जेठ,

ननंद छोटी भगनी सी॥

सिया ठाडी जनक दरबार,

सूरज को लौटा धार रही॥

मैंने बर मांगे श्री भगवान,

देवर छोटे लक्ष्मण से॥

सिया ठाडी जनक दरबार,

सूरज को लौटा धार रही॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।