तेरा दर छड्ड के जाना नहीं

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॥ पावन पाठ ॥

दातेया दातेया, दातेया दातेया...

तेरे सोहने दर नूं छड्ड सतगुरु, साडा होर ठिकाना नहीं,

ना करी चरणी तो साहनु दूर, तेरा दर छड्ड के जाना नहीं ॥

झूठे जग ने बहुत सताया, ताहियों तेरे दर ते आया,

तेरे दर विच किस दा घाटा, मेरा ऐवे जन्म गवायाँ,

तेरे वाजो मेरा पापी दा कोई होर ठिकाना नहीं,

ना करी चरणी तो साहनु दूर, तेरा दर छड्ड के जाना नहीं ॥

नाम दा रंग चढ़ा दे मैनु, डुबदा पार लगा ले मैनु,

पंज छोर जो नजर करे ने, ओहना कोलो बचा ले मैनु,

तेरे दर मीठा अमृत छड्ड के, जहर मैं खाना नहीं,

ना करी चरणी तो साहनु दूर, तेरा दर छड्ड के जाना नहीं ॥

सतगुरु तेरी बंदगी करनी, तहियो तेरे टिकिया चरणी,

तू ही परम पिता मेरे दाता, तुहियो साड्डी रक्षा करनी,

कहे दास निमोना दाता तैनू, दिलो भुलाना नहीं,

ना करी चरणी तो साहनु दूर, तेरा दर छड्ड के जाना नहीं........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।