मईया नाल मेरी मुलाकात हो गयी

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

राती सुपने दे विच मेरी मईया नाल,

मेरी मुलाकात हो गयी,

मुलाकात हो गयी, मुलाकात हो गयी,

राती सुपने दे विच मेरी मईया नाल,

मेरी गल बात हो गयी।।

किती फरियाद मेरी पूरी अज्ज हो गयी,

देख देख रूह माँ नु मेरी खुश हो गयी,

काटे दुःख सारे.. इक इक करके,

सुखो की शुरुआत हो गयी,

राती सुपने दे विच मेरी मईया नाल,

मेरी मुलाकात हो गयी।।

हो गयी मईया मुझसे कुछ थोड़ी भूल है,

ज़िंदगी का कण कण तेरे पैरों की धुल है,

बादल भी बरसने लगे,

वो देखो बरसात हो गयी,

राती सुपने दे विच मेरी मईया नाल,

मेरी मुलाकात हो गयी।।

चरणी लगा के कित्ता प्यार मेरी माई ने,

कोल बिठा के कित्ता मालोमाल माई ने,

सोनू आ गया माँ तेरे दरबार,

विक्की आ गया माँ तेरे दरबार,

ज़िंदगी माँ आसान हो गयी,

राती सुपने दे विच मेरी मईया नाल,

मेरी गल बात हो गयी........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।