चलो अमरनाथ चलिए

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

चलो अमरनाथ चलिए चलो अमरनाथ चलिए,

जो दुनिया दा भाली है ओहदा दर जा मलिये,

स्वर्गा तो वि वध के सोहना शिव भोले दा डेरा है,

अखा भर के तकी जावा दिल न रज दा मेरा है,

जिथे बूटा बूटा खिल्दा खिल्दी हर कलि है

चलो अमरनाथ चलिए....................

भरे भंडारे भोले दे मैं वेखी अजब कहानी है,

था था उते लंगर लगे मिलदा दाना पानी है,

सेवादरा दी सेवा दिखी बड़ी अवली है,

चलो अमरनाथ चलिए....................

विच गुफा दे बेठा भोला कैसा खेल रचाया है,

तेरा दर्शन पान ली आज मानक दर ते आया है,

कहे सितारा रोटक दान चिठ्ठी कलि है,

चलो अमरनाथ चलिए....................

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।