इक रोज़ मुझे माँ मिली

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

इक रोज़ मुझसे माँ मिली,

सपनो के गाव में,

बैठा रहा वही पे मैं,

चरणों की छाँव में,

हे अम्बे मुझको सीख दे,

भक्ति मैं तेरी करू,

जीवन कटे मेरा मईया,

तेरे आँचल की हवाओ में,

इक रोज़ मुझसे माँ मिली,

सपनो के गाव में,

बैठा रहा वही पे मैं,

चरणों की छाँव में,

इक रोज़ मुझसे माँ मिली।

माँ बोली कैसा चल रहा है,

जीवन में मुझे बता,

मैंने कहा ओ माँ मेरी,

सुन तुझसे है क्या छुपा,

भक्तो सुनो क्या दृश्य था,

मंदिर के छाँव में,

मैं तो हुआ भिवोर आके,

भक्ति के गाँव में,

इक रोज़ मुझसे माँ मिली,

सपनो के गाव में.......

ऐसी है मेरी माँ सुनो,

सारे जग की माता है,

ये संयोग है या किसमत है,

माँ से हमारा नाता है,

करुणा है भक्तो के लिए,

माँ की निग़ाओं में,

अर्जी है ‘अरविंद’ की मईया,

रखना दुआओं में,

इक रोज़ मुझसे माँ मिली,

सपनो के गाव में.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।