अम्बे रानी बड़ी तू दानी

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मैया प्यारी मैया,

अम्बे रानी बड़ी तू दानी,

चल मैया जय जय मैया,

जय मैया हो जय जय मैया,

जय मैया जय जय मैया,

दे ममता दे प्यार,

हो बेड़ा कर दो हमरो पार,

बेड़ा कर दो हमरो पार,

ओ बेड़ा कर दो हमरो पार,

बेड़ा कर दो हमरो पार॥

जय मैया जय जय मैया,

जय मैया जय जय मैया,

जय मैया जय जय मैया,

जय मैया जय जय मैया,

गम मिटा दो प्यार,

बेड़ा कर दो हमरो पार,

बेड़ा कर दो हमरो पार,

ओ बेड़ा कर दो हमरो पार,

बेड़ा कर दो हमरो पार,

मैया प्यारी मैया,

अम्बे रानी बड़ी तू दानी॥

ओ सबसे न्यारा सबसे प्यारा,

मैया तोहरी दुवरिया,

ओ श्रद्धा भक्ति से लेके हम,

ऐनी लाल चुनरिया,

चमके चमके दर पे तोहरा,

कंचन कल का ज्योति,

भक्तन के घर भर देलू तू,

सोना, चाँदी, मोती,

जय मैया जय जय मैया,

जय मैया हो जय जय मैया,

जय मैया जय जय मैया,

तू बनजा पतवार,

बेड़ा कर दो हमरो पार,

बेड़ा कर दो हमरो पार,

ओ बेड़ा कर दो हमरो पार,

बेड़ा कर दो हमरो पार,

मैया प्यारी मैया,

अम्बे रानी बड़ी तू दानी॥

मैहर वाली हे माई तू,

प्यारी भोली भाली,

हो चौसठ जोगिनी नाचे दर पे,

भैरव देला ताली,

खेले खेले अरहुल कुलवा,

महके डाली डाली,

चरण पखारे नित दिन,

जहाँ माँ मंज दन की माली,

जय मैया हो जय जय मैया,

जय मैया हो जय जय मैया,

जय मैया हो जय जय मैया,

सुन ले मोर पुकार,

बेड़ा कर दो हमरो पार,

बेड़ा कर दो हमरो पार,

ओ बेड़ा कर दो हमरो पार,

बेड़ा कर दो हमरो पार॥

सुन ले माई सुन ले माई,

हे जगदम्बे तारा,

दीनदुखी हर भक्ता के माई तू ही सहारा,

तोहरे से चमकेला माई सूरज चाँद सितारा,

जय जय बोल...

जय जय बोल भवानी करदी है मन के भीतर उजियारा,

मैया प्यारी मैया,

अम्बे रानी बड़ी तू दानी......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।