हे जग जननी जगदम्बे माँ

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

हे जग जननी जगदम्बे माँ,

जहाँ ज्योत तुम्हारी जग जाती.........-4

घर हो जाता है वो पावन,

जहाँ ज्योति रूप में हो दर्शन,

श्रद्धा से.. जय हो..

श्रद्धा से पूजे तुम को जहाँ,

तुम उस घर में हो बस जाती,

हे जग जननी जगदम्बे माँ,

जहाँ ज्योत तुम्हारी जग जाती॥

जिस घर में माता ज्वाला है,

वो होता किस्मत वाला है,

सुख चैन.. जय हो..

सुख चैन रहे उस घर में सदा,

खुशियां ही खुशियां है आती,

हे जग जननी जगदम्बे माँ,

जहाँ ज्योत तुम्हारी जग जाती॥

तुम नव रूपा हो जगदम्बे,

नौ ज्योति तुम्हारी निराली है

सुख मिलता.. जय हो..

सुख मिलता सबको दर्शन का,

दुनिया है तुम्हारे गुण गाती,

हे जग जननी जगदम्बे माँ,

जहाँ ज्योत तुम्हारी जग जाती॥

माँ ज्योति तुम्हारी नूरानी है,

इस रूप की दुनिया दिवानी है,

ये ज्योत.. जय हो..

ये ज्योत सदा ही घर में जगे,

करू मैं विनती तुम से दाती,

हे जग जननी जगदम्बे माँ,

जहाँ ज्योत तुम्हारी जग जाती........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।