अपार प्रभु लीला

पारंपरिक
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

अपार प्रभु माया, माया है तेरी अपार,

अपार प्रभु लीला, लीला है तेरी अपार॥

तू ही सगुण‌ है, तू ही है निर्गुण,

तू ही है लीला अवतार,

अपार प्रभु लीला, लीला है तेरी अपार,

अपार प्रभु माया माया है तेरी अपार,

अपार प्रभु लीला, लीला है तेरी अपार॥

तूने ही ऐसा प्रजा प्रेम पाया,

त्यागी सिया जैसी नार,

अपार प्रभु लीला, लीला है तेरी अपार,

अपार प्रभु माया माया है तेरी अपार,

अपार प्रभु लीला, लीला है तेरी अपार॥

तूने ही शबरी के बेरों को खाया,

दिखलाया प्रेम अपार,

अपार प्रभु लीला, लीला है तेरी अपार,

अपार प्रभु माया माया है तेरी अपार,

अपार प्रभु लीला, लीला है तेरी अपार॥

वह तो सिला थी प्रकट शाप की थी,

हम पापी हैं अपरंपार,

अपार प्रभु लीला, लीला है तेरी अपार,

अपार प्रभु माया माया है तेरी अपार,

अपार प्रभु लीला, लीला है तेरी अपार॥

उद्देश तेरा सदा ये रहा है,

संसार में हो सुधार,

अपार प्रभु लीला, लीला है तेरी अपार,

अपार प्रभु माया माया है तेरी अपार,

अपार प्रभु लीला, लीला है तेरी अपार॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।